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अंतर्वस्तु दृश्य मार : 44914


राजभाषा कार्यान्वयन कागज़ पर

 

राजभाषा कार्यन्वयन केवल कागज़ पर होता है और उपनिवेशी अफसरशाही की ढृढ़ता या अवस्थिति के कारण प्रयोग में नहीं है। यह अभी भी व्रिटीश औपनिवेशिक अफसरशाही की वास्तविक प्रतिकृति है इसलिए केन्द्र और राज्यों में राजभाषा नीति के कार्यान्वयन में असमर्थ है। न तो शासन करनेवाली जनप्रतिनिधियाँ न उन्हें मार्गदर्शन करनेवाले शीर्षस्थ सिविल सेवक नीति तैयार करने या इनके कार्यान्वयन की समस्याओं से अवगत है (अनुबंध 11)

• जबकि अन्तर्राष्ट्रीय संगठन विशेषता एवं पद आधारित वरिष्ठ सिविल सेवकों को अधिक महत्व देते हुए अफसरशाही की जनतांत्रिक जवाबदेही की सिफारिश करते है। अखिल भारतीय सेवा की मौजूदा ढाँचा बन्द करिअर आधारित अफसर शाही है जो अनुभव के बिना अधिकार के उच्चतम सोपान का एकाधिकार रखते है। अफसरशाही में अधिकाश की भर्ती शहरी क्षेत्रों से करती है जो उच्च लागत की निजी शिक्षण केन्द्रों, गाइड और प्रश्न पत्रों का उपयोग करते है इनकी पहूँच/प्राप्ति ग्रामिण छात्रों से दूर है तथा नगरों में जाने की असुविधा, मकान किराया और महँगी शहरी जीवन दरें आदि आर्थिक बोझ उन्हें वरिष्ठ सिविल सेवाएँ जैसे अखिल भारतीय सेवा में प्रवेश करने से रोकते है। (अनुबंध 12)

अफसरशाही ऐसी सरकार चला रही है जो जनता की सेवा करने में असमर्थ है आर्थिक असमानताँए सृजित करनी है और माओवादी जैसी विकासात्मक आंतकवादियों की वृदि्‌ध को तेज़ करती है।

जबकि लोकतांत्रिक ढ़ग से निर्वाचित सरकारों ने वरिष्ठ सिविल कर्मचारियों का वेतन कम कर दिया है। उदाहरण केलिए हॉगकॉग, वर्ष 2008 में देश में आर्थिक मंदी के बीच भारत सरकार ने उनके वेतन अनेक गुना बढ़ा दिया है। यह राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार कार्यक्रमों की न्यूनतम मज़दूरी से सौ गुना अधिक है।

• जबकि प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (ए आर सी) सर्व श्रेष्ठ सिविल सेवाओं में अधिक से अधिक विशेषता और प्रतिभा व अनुभव रखनेवाले प्रत्येक व्यक्ति केलिए शीर्षस्थ प्रशासनिक पदों में खुली प्राप्ति/पहूँच प्रदान करने की सिफारिश करता है। वर्तमान सरकार ने इसकी उपेक्षा का कारण नहीं बताए है बल्कि दूसरी प्रशासनिक सुधार आयोग गठित की जिसमें उपनिवेश काल के अनुसार शीर्षस्थ सिविल सेवकों की एकाधिकार को मज़बूत करने का प्रस्ताव हैं।

• अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति पर राज्यसरकारों के साथ परामर्श नहीं किया जाता है लेकिन रोस्टर के आधार पर तैनात किया जाता है। मूल गृहराज्य से आए स्वदेशी और अन्य राज्यों से आए बाहरी अधिकारी सभी अंग्रेज़ी प्रेमी है और अंग्रेज़ी आधारित शिक्षा प्राप्त करने के कारण राज्य की भाषाओं में काम नहीं कर सकते। वे भारतीय भाषाओं में नीति एवं रिपोर्ट के मसौदा तैयार नहीं कर सकते। अखिल भारतीय सेवा की अधिकारियाँ सरकारी सेवा केलिए अंग्रेज़ी के उपयोग मज़बूत करते है।

• जबकि अखिल भारतीय सेवाओं का रूपायन राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहित करने केलिए किया है। सभी अधिकारी मातृराज्य को वरीयता देते हैं और वास्तव में किसी भी अधिकारी तनावग्रस्त राज्यों जैसे जन्मू कश्मीर, उत्तर पूर्वी राज्य या माओवादी हिंसा प्रभावित राज्यों का चयन नहीं करते हैं।

• जबकि अंग्रेज़ी भाषा का मातृराज्य ब्रिटेन एकात्मक राज्य है और इंगलैड, स्कोटलैंड और वेइलस या उत्तरी अयरलैंट जैसे किसी भी राज्य गठित करने पर अपने फेडरल अधिकारियों पर नहीं लागू करता है।

• अखिल भारतीय सेवा उपनिवेशवाद का अवशिष्ट है जिसको विश्व में कहीं भी समान्तर नहीं है। विश्व के 194 राष्ट्रों में किसी भी विकसित देश या विकासशील देश इसका अनुकरण नहीं करता है। राज्य सरकारों को राज्यों से पचास प्रतिशत बाहरी लोगों और राज्य के भीतर से 50 प्रतिशत स्वीकार करने की अपेक्षा है जिसमें एक तिहाई राज्य संवर्ग से प्रदत्त अधिकारी होते है जिनको भर्ती में लोकतांत्रिक नियंत्रण की गुजइश कम है और विभागाध्यक्षों के रूप मे उच्च सिविल सेवकों को तैनात किया जाता है।

• जबकि भारतीय प्रशासनिक सेवा में व्यावसायिकता का अभाव है और अव्यावसायिकता/अदक्षता पर निर्भर करते है। उदाहरण तौर पर जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट एक औपनिवेशिक विरासत है जिनको करने केलिए बहुत कुछ कार्य होते है, एक भी कार्य पूर्ण तरह से नहीं कर सकता। भारत में कोई भी स्वास्थ्य सचिव या शिक्षा सचिव बन सकते है चाहे उस क्षेत्र संबधी ज्ञान या अनुभव न हो। लेकिन विश्व के अन्य विकसित देशों में जिस प्रकार हो रहा है उसी प्रकार राजनीतिक नियुक्तियाँ को तैनात करने का अधिकार लोकतंत्रात्मक रूप से निवार्चित सरकारों को नहीं होते है।

• जबकि पुलिस एक राज्य संबधी मामला है और केन्द्रीय सरकार केन्द्रीकृत रूप से भर्ती की गई भारतीय पुलिस सेवा (आइ पी एस/भ.पु.से) के अधिकारियों को राज्यों में थोप लेते है जहाँ पूलिस की भर्ती कांस्टेबल, उप निरीक्षक और उप अधीक्षक जैसे कई स्तरों पर होते है। लेकिन सभी विकसित राज्यों में एक ही स्तर पर होता है। शिक्षितों की भर्ती में अधिकाश अनुपात कांस्टेबल स्तर पर है

• जबकि वन समेत साधारणों का शासन समुदायों द्‌वारा किए जानेवाले उत्तम कार्य है जिसकेलिए एलिनर ओस्टरम को वर्ष 2009 का नुबेल पुरस्कार मिला है। भारतीय वन सेवा के केन्द्रीकृत अफसरशाही जनताओं के स्वासकर आदिवासी लोगों के वन संरक्षण और उनमें नेतृत्व का उद्‌भव सबंधी अधिकारों को नजर अंदाज़ करते है।

अनुलग्नक (11)

भारत का शासन कौन करता है?और कौन उनका मागदर्शन कौन करता है ?

नेतृत्व/नेतागिरी : नेतृत्व का मतलब महान कार्य करना नहीं बलिक सबसे आवश्यक/उपयुक्त की पहचान करना और उन महान कार्य करने के लिए उनको अवसरें प्रदान करना है।

राष्ट्रों की रक्षा

चीन

संयुक्त अमेरिका

भारत

रक्षामत्रीः

जन. लियांग गुआंगले

रक्षा सचिव :

डाँ रौबर्ट एम गेटस्‌

रक्षामंत्रीः

ए.के एन्टनी

जन्म 1940

हेनन विश्व विद्यालय

वर्ष 1943 में जन्म

1974रुसी स्टडीस मे पी.एच.डी.

 

वर्ष 1940 में जन्म केरल से बीए और एल एल बी।

वर्ष 1958 जनवरी में सेना मेंप्रवेश।हेनन विश्वविद्यालय के सरकार कैडरों से स्नातक। सैनिक से आगे बढ़कर, स्काड लीडर, उप प्लाटून लीडर, रक्षा बलों में उच्च पद का प्लाटून लीडर, सेना जनरल श्रेणी धारक।

 

वर्ष 1966 में सी आई ए में प्रवेश और 27 वर्षों तक  आसूचना प्रोफशनल में काम किया। 6 राष्ट्रपति की सेवा । उस अवधि के दौरान उन्होने नेशनल सेकुरिटी काऊंसिल में 9 वर्ष काम किया। सी आइ ए के इतिहास में प्रवेश स्तर से निदेशक तक वह पहला करिअर अधिकारी है।

 

केरल मुख्यमंत्री के रूप में तीन चरणो पर 6 वर्ष । राज्य सभा  सदस्य, केन्द्रीय  सिविल आपूर्ति मंत्रीविपक्ष  के नेता केरल 200624 अ-ूबर 2006 से रक्षा मंत्री ।

 

अनुभव : सैनिक से जनरल तक 40 वर्षें से अधिक रक्षा क्षेत्र में।

 

 

अनुभव : रक्षा क्षेत्र में 27 वर्षों से अधिक, आसूचाना अधिकारी वायु सेना से  से निदेशक सी आई ए तक पदोन्नति

 

अनुभव: रक्षा संबधी व्यावसायिकता  में कोई पूर्वानुभव नहीं है।

 

 

 

संगठनः केन्द्रीय सेना आयोग जिसका अध्यक्ष राष्ट्रपति है, दो उप अध्यक्ष और आठ सदस्य। राष्ट्रपति को छोड़कर सभी सेना  कार्मिक है जो सैनिक से उच्च श्रेणी तक पदोन्नक है। सभीको 25 वर्षे से अधिक अनुभव

website : mod.gov.in

संगठन : 18 अभिकरणें, एक उप सचिव और पाँच अवर सचिव। सभी को रक्षा विभाग में 15 से 20 वर्षों से अधिक अनुभव

 

 

 

 

 

website : Defenselink-mil

संगठन रक्षा विभाग: 12 जनरलिस्ट अधिकारी, एक सचिव एक अपर सचिव

और 9 संयुक्त सचिव

सभी जनरलिस्ट और रक्षा में कोई पूर्वानुभव नहीं

 

 

website : mod.nic.in

स्वस्थ राष्ट्रें

चीन स्वास्थ्य मंत्री

डौ चेन सु

वर्ष 1953 में जन्म

सचिव स्वस्थ्य एवं मानवीय सेवाएँ

श्री कथलीन सेवेलस

जन्म 1949

भारत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री

श्री गुलाम नबी आज़ाद

जन्म 1949

शानगाई 2 मेडिकल कालेज से स्नातकोत्तर डिग्री, डौकटर कालेज डिग्री पारीस सं7, पारिस विश्व विद्यालय

 

रुजिन अस्पताल में प्रोफेसर चीन सायनस अकादमी के अकादमी सदस्य, नेशनल जीन दक्षिण रिसर्च सेन्टर के निदेशक, उपाध्यक्ष, चाइनाअकादमी औफ  सायनस 

पुरस्कार : अनेक पुरस्कार, तृतीय  विश्व विज्ञान अकादमी और  फ्रेंच अकादमी ऑफ सायनस

ट्रिनिटी कालेज से

 बी ए (राजनीतिक विज्ञान)

कनसास विश्वविद्यालय से

एमपीए(लोक प्रशासन में पी जी)

कनसास ट्रायल अधिवक्ता 8 वर्षों केलिए कनसास में आठ

वर्षों तक प्रतिनिधि

कनसास बीमा आयुक्त (8 वर्ष)

कनसास का गर्वनर 6 (वर्ष)

 

पुरस्कार  2002 में

मार्डन हेल्थ केयर पत्रिका उन्हें विश्व के शक्तिशाली 100 स्वास्थ्य सुरक्षा लोगों की सूची में जोड. दिया है। गर्वनर के रूप में स्वास्थ सुरक्षा सुधार में अनेक प्रयास

कश्मीर विश्व विद्यालय से प्राणीविज्ञान में स्नातकोत्तर डिग्री

 

अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव के रूप में लगातार नौ बार और कांग्रेस कार्य समिति में लगातार 18 वर्षों से सदस्य। अखिल भारतीय यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष। भारत के संसदीय मामले मंत्री, पर्यटन और नागरिक उड़ान मंत्री, शहरी विकास मंत्री, विधि एवं संसदीय मामले मंत्री, जन्मू कश्मीर का मुख्यमंत्री

 

 

अनुभव : स्वास्थ्य क्षेत्र में 30 वर्ष का अनुभव।

 

अनुभव : स्वास्थ्य बीमा में 24 वर्षों का अनुभव जिसमें 16 वर्षों का सीधा अनुभव

अनुभवः जीवनवृत्त में स्वास्थ्य क्षेत्र में पूर्व अनुभव संबधी कोई विवरण नहीं।

संगठन : सात उपमंत्री और तेरह महानिदेशक वस्तुत सभी को 15 से 20 वर्षों तक स्वास्थ्य क्षेत्र  में अनुभव

 

Website : hhs.gov.

संगठन :     एक उपसचिव और सात सहायक सचिव

सभी को स्वास्थ्य क्षेत्र में सेवा करने में 10 से वर्षों का अनुभव

 

 

Website :  hhs.gov

संगठन : चार  पाँच सचिव, अपर सचिव,

आठ से अधिक संयुक्त सचिव सभी सामान्य सूची से। किसी को पूर्व सीधा अनुभव नहीं।

 

Website : mohfw.nic.in

 

राष्ट्रों को शिक्षा देना

चीन

शिक्षा मंत्री

ज़ोन जी मंत्री

अमेरिका

अमेरिका शिक्षा सचिव

अर्ने टंकन

भारत

मानव संसाधन

विकास मंत्री

श्री कपिल सिबल

वर्ष 1946  में जन्म

1987 हार्डवार्ड

बी.ए.समाजशास्त्र

 

 

सेन्ट सटीफन कालेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली से स्नातकोत्तर डिग्री (इतिहास)

एल एल एम हार्डवार्ड लो स्कूल, अमेरिका वर्ष 1972 में विधि क्षेत्र में प्रवेश और 1983 में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नाम लिर्देश 1989 दिसंबर में भारत के अपर सौलिस्टीर 1990 तक ज़ारी रखा।

उच्चतम न्यायालय बार एसोसिष्शन का अध्यक्ष (दो बार) सांसद, राज्य सभा 1998  2004

कांग्रेस वक्ता अगस्त 200002

सचिव कांग्रेस संसदीय पार्टी

1980-1984 अमेरिका के बफलो विश्व विद्यालय से पि.एच.डी अनुसंधान एवं एम एस डिग्री (वाचस्पति)

ज़िनजांग इंजीनियर कालेज में आठ वर्षों तक अध्यापक, हुआजांग विश्वविद्यालय व प्रौद्योगिकी में 11 वर्षों तक अध्यापक, 2 वर्षों तक उपाध्यक्ष और हुआजांग विश्वविद्यालय का अध्यक्ष (4 वर्षों तक)

19992001  हुआजांग विश्व विद्यालय अध्यक्ष, महा निदेशक और वुहान का मेयर

20022003 सीपीसी के उपमंत्री और उचिव सचिव (शिक्षा मंत्राल्य समिति)

19921998 एरियल एजुकेशन इनीशेटीव एरियल

19982001 उपमुख्य अधिकारी चिक्कागे पष्लिक स्कूल, सी ई ओ पौल वल्लास

20012009 चिकागे पष्लिक स्कूल के मुख्य कार्यकारी चिकागे स्कूल के शासन लेने के नै महीने बाद टंकन ने 3 स्कूलें बन्द किया। उन्होने नौकरी केलिए पुनः आवेदन देने को अध्यापकों को बाध्य किया । अध्यापक यूनियन द्‌वारा इस निर्णय का घोर निन्दा की है फिर भी मानना पड़ा। लेकिन अपने कार्यकाल के 7 वर्षों में उन्होने 75 नए स्कूल खोल दिए जों अधिकांश चार्टर स्कूल रहा।

 

अनुभव : शिक्षा में 22 वर्षों का अनुभव

अनुभवः शिक्षा क्षेत्र में 15 वर्षों का सीधा अनुभव

अनुभव : शिक्षा मंत्रालय में कोई पूर्व अनुभव घोषित नहीं

संगठन : छ : उप मंत्री, दो सहायक मंत्री और 25 महा निदेशक सभी को 25 वर्षों से अधिक अनुभव

वेबसाइट moe.edu.in

संगठन : एक उप सचिव, एक अपर सचिव, सात सहायक सचिव और सात अधिकारी सभी को वर्षों का अनुभव

 वेबसाइट ed.gov

संगठन : एक सचिव और 6 संयुक्त सचिव शिक्षा क्षेत्र में सीधा अनुभव नहीं

 वेबसाइट education.nic.in